Hindi Short Stories With Moral – Moral Stories in Hindi

Hindi Short Stories With Moral – Moral Stories in Hindi

Hindi Short Stories With Moral – Moral Stories in Hindi

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम Shivu है और HindiZila.com में आपका स्वागत है 
आज मैं आपके बीच 7 New Hindi Short Stories With Moral – Moral Stories in Hindi लेकर आया हूं तो आइए शुरू करते हैं

आलसी बेटा (Hindi Short Stories With Moral – Moral Stories in Hindi)

Hindi Short Stories With Moral - Moral Stories in Hindi
Hindi Short Stories With Moral – Moral Stories in Hindi
एक गांव में एक अमीर साहूकार अपनी पत्नी और अपने बेटे के साथ रहता था । उसके बेटे का नाम सोहन था सोहन बहुत ही आलसी था जबकि साहूकार बहुत मेहनती था । वह रोज सुबह सूर्योदय से पहले शिव मंदिर जाता था उसके बाद वो अपने खेतों में जाता था ।
और जहां उसका कारोबार था वहां पर जाता था साहूकार अपने बेटे के आलसीपन से बहुत परेशान था रोज सुबह अपने बेटे को उठाता था और कहता था चलो मेरे साथ काम कर लो लेकिन सोहन नहीं जाता था और सोता रहता था फिर साहूकार परेशान होकर अकेले ही चला जाता था ।
कुछ समय बाद साहूकार की तबीयत बहुत खराब हो गई और कुछ ही दिनों में उसकी मृत्यु हो गई साहूकार के मरने के बाद भी उसके आलसी बेटे ने अपने कारोबार पर ध्यान नहीं दिया जिससे उन्हें कारोबार में बहुत ज्यादा नुकसान होने लगा यह देखकर सोहन की मां ने बहुत दुखी होते हुए कहा कि बेटा हमें कारोबार में बहुत नुकसान हो रहा है ।
तो सोहन बोला कि मैं इसमें क्या कर सकता हूं मुझे इस कारोबार की कुछ भी समझ नहीं है मैं तो पिताजी के साथ आज तक खेत भी नहीं गया । फिर सोहन की मां उसे अपने नाना जी के पास भेजती है और कहती है कि तुम्हारे नाना को इस कारोबार की बहुत समझ है तुम उनसे जाकर पूछो कि मुझे क्या करना चाहिए फिर सोहन अपने नाना के पास जाता हैअपने नाना जी के पास पहुंचने के बाद अपने नाना से कहता है ।

Hindi Short Stories With Moral – Moral Stories in Hindi

अपने नाना जी के पास पहुंचने के बाद अपने नाना से कहता है कि पिताजी के गुजर जाने के बाद हमारे कारोबार में बहुत नुकसान हो रहा है और मां ने बताया कि आप को कारोबार की बहुत समझ है इसलिए अब आप ही मेरे परेशानियों का हल निकालिए फिर सोहन के नाना बताते हैंअपने नाना जी के पास पहुंचने के बाद अपने नाना से कहता है ।


जैसे मैं बता रहा हूं तुम्हें वैसा ही करना होगा तुम्हे अपने पिता की तरह रोज सूरज के उगने से पहले शिव मंदिर जाना होगा और उसके बाद जहां जहां तक तुम्हारा काम फैला हुआ है वहां जाना होगा और तुम्हें ऐसा हर रोज करना होगा।

फिर सोहन जैसे उसके नानाजी बताए थे वैसे ही वह करता था रोज सुबह सूरज उगने से पहले उठ जाता था और सबसे पहले शिव मंदिर जाता था और उसके बाद उसका जहां जहां कारोबार फैला हुआ था वहां पर जाने लगा
कुछ दिनों तक ऐसा ही चलता रहा उसे रोज रोज काम पर आता देख कर उसके मजदूर आपस में बात करने लगे कि मालिक अब रोज-रोज हमारा काम देखने आते हैं ।
और लगता है हमें यह घोटाले बाजी बंद करनी पड़ेगी वरना हम पकड़े जाएंगे फिर पकड़े जाने के डर से सभी मजदूरों ने घोटाले बाजी बंद कर दीया घोटाले बंद होने के कारण कारोबार में नुकसान होना भी बंद हो गया और धीरे-धीरे सोहन और उसकी मां पहले की तरह ही अमीर हो गए और खुश रहने लगे ।


फिर सोहन को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने आलस करना छोड़ दिया और वह अपना कारोबार बहुत मेहनत और लगन से संभालने लगा ।

मोरल (Moral)


इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है की आलस एक बुरी बला है ।

इसलिए हमें आलस त्याग कर अपना काम समय पर करना चाहिए ।
 

मेहनत का फल (Hindi Short Stories With Moral – Moral Stories in Hindi)

Hindi Short Stories With Moral - Moral Stories in Hindi
Hindi Short Stories With Moral – Moral Stories in Hindi
दो दोस्त थे  अजय और संतोष दोनों बेरोजगार थे उन्होंने अपने परिचित गुरुजी से अपनी परेशानी बताई और कहा गुरु जी हमें कुछ रुपए दीजिए जिससे हम कुछ काम धंधा शुरू कर सकें गुरुजी ने दोनों दोस्तों को एक-एक 1000 रुपए दिए साथ ही यह कहा कि 1 साल के अंदर तुम्हें इन रुपयों को लौटाना होगा ।
दोनों ने गुरुजी की बात मान ली और वे रुपए लेकर चले गए ।रास्ते में अजय ने कहा हमें इन रुपयों से कोई अच्छा काम शुरू करना चाहिए पर संतोष ने कहा नहीं अब हम कुछ दिन अच्छे स्थानों पर घूमने जाएंगे मौज करेंगे फिर दोनों अपने अपने रास्ते निकल जाते है काम शुरू करने।
1 साल बीत जाने के बाद दोनों दोस्त गुरुजी के पास पहुंचे गुरुजी ने पहले संतोष से पूछा तुमने रुपयों का क्या किया? क्या लौटाने के लिए रकम लाए हो? संतोष ने मुंह लटका कर जवाब दिया गुरुजी किसी ने धोखा देकर रुपए ठग लिए । 

Hindi Short Stories With Moral – Moral Stories in Hindi

फिर उन्होंने अजय से पूछा तुम भी खाली हाथ आए हो क्या फिर अजय ने मुस्कुराकर जवाब दिया नहीं गुरु जी यह लीजिए आपके ₹1000 और Extra ₹1000 गुरुजी ने पूछा तुम इतने रुपए कैसे कमा लिए क्या तुमने किसी को धोखा दिया है?
अजय बोला नहीं मैंने तो अपनी सूझ-बूझ और मेहनत से यह रुपए कमाए हैं एक किसान को परेशान देखकर मैंने उसके सारे फल खरीद लिए फिर उन्हें शहर में जाकर बेच दिया इसके बाद वह प्रतिदिन मुझे फल लाकर 
देता था और मैं उन्हें शहर में जाकर बेच देता था ।
कुछ दिनों के बाद मैंने शहर में दुकान ले ली और फलों का कारोबार शुरू किया इतना कहकर उसने गुरुजी को Help करने के लिए धन्यवाद दिया और Extra रुपए किसी जरूरतमंद को देने के लिए रखने का आग्रह किया । गुरु जी अजय से बहुत खुश हुए उन्होंने संतोष से कहा अगर तुम भी समझदारी तथा मेहनत से काम करते तो सफल हो सकते थे ।
फिर संतोष ने कहा अभी भी कुछ बिगड़ा नहीं है पूरी मेहनत और लगन से काम शुरू करो तुम जरूर कामयाब होगे ।
 
मोरल (Moral)
 
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है ।
समय का सम्मान करो और श्रम का महत्व समझो सफलता तुम्हारे कदम चूमेगी ।
 

घमंडी कौए (Hindi Short Stories With Moral – Moral Stories in Hindi)

Hindi Short Stories With Moral - Moral Stories in Hindi
Hindi Short Stories With Moral – Moral Stories in Hindi
एक नन्ही सी चिड़िया रात होने के कारण अपने घर का रास्ता भूल गई और एक पेड़ पर बैठ गई वह जिस पेड़ पर बैठी थी उस पेड़ पर बहुत सारे कौए बैठे थे  ।सब चिल्लाने लगे हमारे पेड़ पर से भागो, तुम कहां से आई हो, यहां से चली जाओ । 
नन्ही चिड़िया ने उनसे विनती की बारिश होने वाली है मुझे थोड़ी देर यहीं पर रुक जाने दो। लेकिन कौए ने उसकी एक न सुनी आखिरकार नन्ही चिड़िया उड़ कर दूसरे पेड़ पर बैठ गई । वह जिस पेड़ पर बैठी थी उसी के नीचे एक खाली गड्ढा मिल गया जिसमें वह आराम से जाकर छुप गई 
कुछ ही देर में भारी बारिश होने लगी और बड़े-बड़े ओले गिरने लगे कई कौए घायल भी हो गए और कई तो मर भी गए । जब बारिश बंद हुई तो नन्ही सी चिड़िया बाहर निकली और अपने घर की तरफ उड़ चली । तभी रास्ते में एक कौवा मिला और वह चिड़िया से पूछा तुम्हें चोट नहीं लगी? 
फिर चिड़िया बोली दूसरों पर दया करने वालों की सहायता ईश्वर करता है ।और तुम्हारे जैसे घमंडियों को कष्ट सहने के लिए छोड़ देता है यह कह कर वहां से अपने घर चली गई।
मोरल (Moral)


इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है ।
हमेशा दूसरों की सहायता करें आपकी सहायता ईश्वर करेंगे ।

 

जैसी संगत वैसी रंगत (Hindi Short Stories With Moral – Moral Stories in Hindi)

Hindi Short Stories With Moral - Moral Stories in Hindi
Hindi Short Stories With Moral – Moral Stories in Hindi
एक कलाकार रात दिन काम में लगा रहता था । एक दिन उसने सोचा कि ऐसा चित्र बनाया जाए कि जिसे लोग देखकर समझ जाए कि सुंदर बालक बहुत ही सरल और भोला भाला है । फिर कलाकार को ऐसा ही बालक मिल गया । और वह उसी का चित्र बनाने लगा रात दिन के कठोर परिश्रम से चित्र में वह उन भावों को लाने में सफल हो गया ।


जिन्हें वह लोगों को दिखाना चाहता था चित्र इतना सुंदर बना कि लोग देखते ही रह जाते थे । चित्र छपने के बाद हजारों कॉपियां बिकी कलाकार उस एक ही चित्र से बहुत धनवान बन गया। और बहुत ही आराम से रहने लगा समय बीतता गया और एक दिन कलाकार के मन में एक इच्छा जागी कि वह एक दुष्ट आदमी का चित्र बनाएं ।

देखे की लोगों पर उसका क्या असर पड़ता है । उस चित्र में दुष्ट स्वभाव को उभारना होगा उसने सोचा इसके लिए किसी दुष्ट व्यक्ति को ढूंढना चाहिए वह ऐसे आदमी को जगह-जगह ढूंढने लगा घूमते घूमते वह जेल के सामने पहुंच गया । 

Hindi Short Stories With Moral – Moral Stories in Hindi

उसे लगा कि जेल में उसे ऐसा आदमी मिल जाएगा जेल के एक कैदी के पास जाकर बोला मैं एक चित्रकार हूं आज तक मैंने बहुत सारी सुंदर चित्र बनाए हैं । मैं तुम्हारा भी एक चित्र बनाना चाहता हूं । यह देखो मेरे बनाए हुए चित्र चित्रों को देखकर कैदी के आंखों से आंसू बहने लगे कलाकार को यह देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ ।
उसने पूछा क्या बात है भाई तुम यह चित्र देखकर रोने क्यों लगे ? कैदी बोला आपने जो चित्र दिखाएं हैं उनमें से बालक वाला चित्र मेरा ही है । कलाकार को विश्वास नहीं हुआ फिर बोला कि तुम इस हालत में कैसे पहुंचे ?
फिर वह बोला बचपन में ऐसे ही था फिर उसके बाद मैं लगातार गलत संगत मैं पड़ता गया फिर उसके बाद जो मेरी हालत हुई वह आप देख ही रहे हैं ।
कलाकार अपने चित्र में गलत संगत को ही उभारना चाहता था ताकि लोग देखकर समझ सके बुरी संगत से क्या हानि होती है ।
मोरल (Moral)
हमें इस कहानी से यह सीख मिलती है ।

“जैसी संगत वैसी रंगत” इसलिए आपको हमेशा अच्छे लोगों के साथ अपनी संगत बनाए रखना चाहिए।

 

मेहनत बड़ी या अकल? (Hindi Short Stories With Moral – Moral Stories in Hindi)

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Ankit और Abhinav नाम के दो दोस्त थे दोनों की दोस्ती बड़ी ही पक्की थी  पढ़ाई ख़त्म होने के बाद दोनों की एक ही जगह नौकरी भी लग गई फिर नौकरी लगने के बाद दोनों एक दूसरे से कैंटीन में बात करते है 
Ankit कहता है सालों की मेहनत के बाद आखिर हमें नौकरी मिल ही गई अब हम यहां पर भी जम कर मेहनत करेंगे और कुछ ही सालों में हमें Promotion भी मिल जायेगा । और Promotion तो मिलना ही चाहिए हम इतनी मेहनत जो करते है । हमारे बॉस चाह कर भी हमें मना नहीं कर पाएंगे 
फिर दोनों खाना खाने के बाद दोनों अपने काम पर लग जाते है फिर काम करते करते अब उन्हें एक साल बीत चूका था और दोनों Promotion का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे । फिर दोनों के बॉस अपने कैबिन में बुलाते है और सिर्फ Abhinav को Promotion देते है 
Ankit  को नहीं देते हैं फिर Promotion में अपना नाम न सुन कर Ankit को धक्का लगता है और वो नाराज़ हो जाता है । तभी Abhinav उसे बोलता है कोई बात नहीं Ankit ऐसा हो जाता है तुमने बहुत मेहनत की है सायद हमारे बॉस को कुछ पसंद नहीं आया होगा पर तुम देखना अगली बार तुझे जरूर Promotion मिलेगा 
फिर Ankit गुस्से में अपने बॉस के पास जाता है और नौकरी छोड़ने की बात करता है । और कहता है सर मैं ये नौकरी नहीं करना चाहता हूँ और आज ही मैं ये नौकरी छोड़ना चाहता हूँ  फिर उसके बॉस पूछते है लेकिन क्यों? अचानक से तुम्हे क्या हो गया ?
फिर Ankit कहता है सर मैं पिछले एक साल से पूरी मेहनत से काम करता हूँ मैं और Abhinav एक ही साथ यहाँ पर काम करने आये थे लेकिन Promotion सिर्फ उसे ही मिला मुझे नहीं और गुस्से में Ankit अपने बॉस को बहुत सी गलत बातें भी बोल जाता है जो उसे नहीं बोलनी चाहिए थी 

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उसकी सारी बात उसके बॉस ध्यान से सुनते है और बोलते है Ankit मुझे पता है तुमने बहुत मेहनत की है पर उतना नहीं जितना तुम्हे करनी चाहिए थी । फिर Ankit कहता है बस मैं यहां काम नहीं करूँगा तब उसके बॉस बोलते है की मैं तुम्हे Promotion भी दे दूंगा और और Abhinav से ज्यादा सैलरी भी दूंगा पर उसके लिए तुम्हे एक काम करना होगा 
फिर Ankit बोला ठीक है मैं करूँगा । फिर उसके बॉस बोलते है की तुम बाजार में जा कर पता करो की वहां पर आम कौन-कौन बेच रहा है । Ankit बाजार में जाता है और पता करके वापस आता है और बोलता है सर बाजार में सिर्फ एक आदमी आम बेच रहा है 
फिर उसके बॉस बोलते है ठीक है अब फिर से जाओ और पूछ के आओ की कितने रुपये किलो के भाव से आम दे रहा है । Ankit फिर से बाजार में जाता है और पूछ के आता है और अपने बोस से कहता है सर 50 रुपये किलो बेच रहा है 
फिर उसके बोस कहते है ठीक है अब मैं यही काम Abhinav को देता हूँ फिर Abhinav को बुलाते है और उसे भी बाजार भेज देते है फिर Abhinav बाजार जेक आमों का पता लगता है और फिर बापस अपने बोस के पास आता है 
और कहता है सर बाजार में एक ही आदमी है जो आम को 50 रुपये किलो बेच रहा है अगर हम उससे सारे आम खरीद ले तो वो हमें 40 रुपये किलो की कीमत में दे देगा । उसके पास 300 किलो आम है अगर हम सारे आम 40 रुपये किलो  में खरीद कर उन्ही आमों को बाजार में 50 रुपये किलो बेचे तो हमें बहुत सारा मुनाफा होगा
फिर Abhinav की बात सुन कर Ankit बहुत हैरान होता है और उसे अपनी गलती का एहसास हो जाता है उसे ये पता चल जाता है की सिर्फ मेहनत करने से काम नहीं होता है हमें अपनी अक्ल का भी इस्तेमाल करना चाहिए 
मोरल (Moral)
इस कहानी से हमें ये शिछा मिलती है 
हमें हमेशा काम करते समय अपनी बुद्धि का भी इस्तेमाल करना चाहिए 
जब मेहनतऔर बुद्धि साथ मिलते है तो काम हमेशा अच्छा ही होता है 
 

अच्छाई का इनाम (Hindi Short Stories With Moral – Moral Stories in Hindi)

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किसी शहर में बबलू नाम का एक लड़का रहता था । वह पढ़ाई में बहुत अच्छा था वह अपनी टीचर के बात को गौर से सुनता था और हमेशा याद रखता था  1 दिन टीचर बच्चों से कहती है बच्चों हमें हमेशा जरूरतमंदों की Help करनी चाहिए अगर तुम्हें कभी जरूरतमंद दिखाई दे तो उसकी Help जरूर करना 
बबलू ने टीचर की यह बात भी याद कर ली एक दिन जब बबलू स्कूल से घर लौट रहा था । तब उसने देखा एक Dog सड़क के किनारे बैठा है और चोट के कारण उसके पैर से खून निकल रहा है । Dog को देखकर वह बोला अरे Dog यहां कैसे आया इसका मालिक भी नजर नहीं आ रहा और इसे चोट भी लगी है 
फिर उसे टीचर की कही बात याद आई कि हमें जरूरतमंदों की Help करनी चाहिए ऐसा सोचकर बबलू ने Dog को उठाया और उसे लेकर अपने घर की तरफ चल दिया घर पहुंचकर Dog के बारे में अपने मम्मी पापा को बताया की मम्मी देखो इसको बहुत चोट लगी है 
फिर Dog को डॉक्टर के पास लेकर जाते हैं फिर डॉक्टर ने Dog का इलाज किया और डॉक्टर ने बोला कि बबलू इसका ध्यान रखना । फिर बबलू हमेशा Dog के साथ रहने लगा स्कूल से आने के बाद वो सारा दिन Dog का ध्यान रखता था  उसे खाना खिलाना पानी पिलाना उसका ध्यान रखना उसे बहुत अच्छा लगता था 
कई बार Dog को देखकर बबलू मन ही मन सोचता था काश यह Dog मेरा होता बबलू की देखरेख से Dog कुछ ही दिनों में ठीक हो गया और वह बबलू के साथ खेलने लगा दिन बीतते गए बबलू और Dog की दोस्ती और गहरी होती गई  एक दिन जब बबलू और Dog शाम को पार्क से खेल कर लौट रहे थे 
तब उन्होंने देखा कि Dog का मालिक Dog को लेने आया है Dog अपने मालिक को देखकर बहुत खुश हुआ और अपने मालिक के पास दौड़कर चला जाता है । और दूसरी तरफ बबलू बहुत दुखी था और सोचने लगा कि अब यह Dog को ले जाएंगे 
फिर Dog के मालिक ने बबलू से कहा तुमने टॉमी का बहुत ध्यान रखा क्या टॉमी को तुम हमेशा अपने पास रखना चाहोगे ? अंकल के इस सवाल पर बबलू चौक गया उसे अपने कानों पर विश्वास नहीं हो रहा था  फिर बबलू बोला लेकिन यह तो आपका Dog है 
तब अंकल बोले मैं अक्सर काम के सिलसिले में बाहर रहता हूं और इसका ख्याल नहीं रख पाता हूं । ना जाने उस दिन कब घर से बाहर निकल आया और इसे चोट लग गई । वैसे भी खेलने के लिए इसे तुम्हारे जैसे छोटे दोस्त की जरूरत है तो इसे अपनी अच्छाई का इनाम ही समझ लो
तुमने बिना किसी लालच के सड़क पर पड़े एक Dog की Help की है यह तुम्हारे बिना किसी स्वार्थ के की गई अच्छाई का इनाम है  यह सुनकर बबलू की आंखों में खुशी के आंसू आ गए अंकल की बातों से आज बबलू निस्वार्थ की गई अच्छाई का महत्व समझ गया था उसने मन ही मन निश्चय किया कि वह हमेशा निस्वार्थ जरूरतमंदों की Help करेगा 
मोरल (Moral)
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है
हमें निस्वार्थ अच्छाई करते रहना चाहिए
क्योंकि हर अच्छाई का इनाम हमें कभी ना कभी जरूर मिलता है
 

बड़ी सीख (Hindi Short Stories With Moral – Moral Stories in Hindi) 

Hindi Short Stories With Moral - Moral Stories in Hindi
Hindi Short Stories With Moral – Moral Stories in Hindi
बहुत पुरानी बात है एक आश्रम था जहां पर बहुत दूर-दूर से बच्चे शिक्षा ग्रहण करने आते थे । उन्हीं में से  दो बच्चे थे मोहन और कमल उन दोनों की शिक्षा पूरी हो चुकी थी । आश्रम के नियम के अनुसार उन्हें अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद घर जाना था
लेकिन जब मोहन और कमल घर जाने लगे तो उन्हें गुरुजी ने अपने पास बुलाया और कहा बच्चों और तुम अपनी शिक्षा पूर्ण करके अपने अपने घर जा रहे हो लेकिन तुम्हें अपने घर जाने से पहले एक और परीक्षा देनी होगी इस परीक्षा में अगर तुम सफल हुए तो तुम्हें घर जाने दिया जाएगा लेकिन अगर तुम विफल हुए तो तुम्हें यही रुकना पड़ेगा 
तभी मोहन गुरुजी से पूछता है गुरु जी आप किस परीक्षा के बारे में बात कर रहे हैं हमने तो अपनी शिक्षा पूरी कर ली है और आज तो हमें घर भी जाना है फिर अब कौन सी परीक्षा देनी है?
इस बात पर गुरु जी ने मुस्कुराते हुए कहा तुम दोनों मेरा एक छोटा सा काम करो अगर तुम दोनों सफल हुए तो तुम अपने घर जा सकते हो । फिर दोनों बोलते हैं कि गुरु जी आप काम बताइए हम अवश्य ही परीक्षा देंगे फिर गुरु जी कहते हैं बच्चों तुम दोनों को मैं कबूतर देता हूं और तुम्हें इसको मारना है 
तुम इन्हें ऐसी जगह पर मारना जहां पर तुम्हें कोई देख ना रहा हो । मोहन और कमल दोनों ही उन कबूतरों को  मारने के लिए लेकर चले जाते हैं  मोहन अपने कबूतर को लेकर एक सुनसान गुफा में जाता है और वहां जाकर देखता है कि इस गुफा में कोई नहीं है और सोचता है कि मैं यहीं पर इसको मारूंगा

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और किसी को पता भी नहीं चलेगा फिर मोहन उसी गुफा में कबूतर की गर्दन मोड कर मार देता है और गुरु जी के पास आश्रम में जाता है और कहता है गुरु जी मैंने उस कबूतर को मार दिया है अब तो मैं घर जा सकता हूं ना और पूछता है कि मैं इस परीक्षा में सफल हो गया हूं
गुरुजी कबूतर को देखकर परेशान हो जाते हैं और कबूतर को हाथ में लेते हैं और कहते हैं देखो कमल मैंने तुम दोनों को कबूतर दिया था और सिर्फ तुम ही अभी आए हो तो अभी तुम्हें मोहन का इंतजार करना पड़ेगा मैं तभी अपना फैसला सुना पाऊंगा
शाम हो गई थी और अंधेरा भी चुका था लेकिन कमल अभी तक नहीं आया और गुरु जी को उसकी चिंता होने लगी थी तभी उन्हें दूर से कमल आता हुआ दिखाई देता है 
फिर गुरुजी पूछते हैं कमल तुम इतनी देर से क्यों आए ? और तुम्हारे हाथ में यह कबूतर जिंदा  कैसे हैं? मैंने तो तुम्हें इसे मारने के लिए कहा था फिर कमल कहता है गुरु जी यह बहुत लंबी कहानी है बस आप यह समझ लीजिए कि मैं इस परीक्षा में सफल नहीं हुआ
मुझे क्षमा करें मैं इस कबूतर को नहीं मार पाऊंगा और इस कारण मैं अपने घर भी नहीं जा सकता यह सुनते ही गुरुजी उससे से कहते हैं रुको कमल जब तक तुम हमें पूरी बात नहीं बताओगे हम तुम्हें आश्रम में प्रवेश नहीं करने देंगे बताओ क्या हुआ था तुम्हारे साथ
कमल कहता है गुरु जी जैसा कि आपने कहा था कि कबूतर को ले जाकर वही मारना है जहां पर कोई नहीं देख रहा होगा । तो मैंने वही किया और मैं इसे मारने के लिए जंगल में ले गया लेकिन वहां पर मौजूद सारे जानवर मुझे देख रहे थे


फिर मैं उसे जंगल के अंदर ले गया वहां पर जानवर तो मौजूद नहीं थे पर सारे पेड़ पौधे मुझे देख रहे थे । इसके बाद इसे में समुद्र ले गया तो वहां पर सारी मछलियां और समुद्र देख रहा था । जब मैं इसे मारने के लिए पहाड़ पर ले गया तो वहां पर सन्नाटा देख रहा था 

इसके बाद मैं एक गुफा के अंदर ले गया तो वहां पर मुझे अंधेरा देख रहा था और इन सबसे बड़ी बात मैं इसे मारते हुए खुद देख रहा था 

गुरु जी यह बात सुनकर मुस्कुराए और कमल से कहा तुमने तो सबसे बड़ी शिक्षा ग्रहण की है जो मैं तुम्हें समझाना चाहता था वह तुम समझ गए तुमने इस कबूतर को इसलिए नहीं मारा कि तुम्हें सब देख रहे थे, एकांत में भी 
यही हमारा भय है जो हमें गलत काम करने से रोकता है अगर हम सब कुछ भी गलत करने से पहले यह सोच ले कि हमें कोई न कोई देख रहा है तो हम गलत काम नहीं करेंगे बस यही मैं तुम्हें समझाना चाहता था । और तुम बहुत अच्छे से समझ गए 
फिर गुरुजी ने अपनी शक्तियों से कबूतर को जीवित कर दिया जिस कबूतर को मोहन ने मारा था । गुरुजी की बात सुनकर मोहन को यह अंदाजा हो गया उसे अभी और शिक्षा की जरूरत है इसलिए चुपचाप आश्रम चला गया  और कमल वापस अपने घर चला गया
मोरल (Moral)
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है
हमें कुछ भी बुरा करने से पहले 10 बार सोचना चाहिए और कुछ भी बुरा करना ही नहीं चाहिए
दोस्तों मैं आशा करता हूं कि आप को Hindi Short Stories With Moral – Moral Stories in Hindi पढ़ के आपको बहुत अच्छा  लगा होगा इसी तरह की और कहानी के लिए हमारे इस HindiZila.com Blog पर daily visit करें धन्यवाद!

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