Mahatma Gandhi Biography – महात्मा गांधी की जीवनी-

Mahatma Gandhi Biography – महात्मा गांधी की जीवनी-

Mahatma Gandhi Biography – महात्मा गांधी की जीवनी

Mahatma Gandhi Biography – महात्मा गांधी की जीवनी- नमस्कार दोस्तों मेरा नाम Shivu है और HindiZIla.com में आपका स्वागत है आज मैं आपके बीच एक महापुरुष Mahatma Gandhi Biography – महात्मा गांधी की जीवनी- लेकर आया हूं तो आइए शुरू करते हैं

दोस्तों आज हम एक आजाद भारत में साँस लेते हैं क्योंकि 15 अगस्त 1949 को भारत को आजादी मिली थी और देश को आजाद करने के लिए ना जाने कितने लोगों ने अपना जीवन तक दे दिया था हालाँकि यहां भी देश की आजादी के लिए लड़ने वाले दो अलग अलग विचार धाराओं में बटे हुए थे जिनमे से एक तरफ तो वो लोग थे जो आजादी को अपनी ताकत के दम पर छीनना चाहते थे 

तो वहीँ कुछ लोग शांति पूर्वक अहिंसा के मार्ग पर चल कर आजादी हांसिल करना चाहते थे और इन्ही अहिंसक वादी लोगो में से एक राष्ट्र पिता कहे जाने वाले मोहन दास करम चंद गाँधी जिन्हे हम आम तौर पर महात्मा गाँधी के नाम से जानते है और दोस्तों गाँधी जी भारतीय इतिहास के वह वयक्ति हैं जिन्होंने देश हित के लिए अंतिम साँस तक लड़ाई की है 

और उन्ही की तरह हजारो वीरों की वजह से हमारा भारत देश 1947 में आजाद हुआ था
आज हम भारत के सबसे लोकप्रिय लोगों में से एक Mahatma Gandhi जी के जीवन के बारे में जानेंगे की किसी तरह अहिंसा के मार्ग पर चलने वाले महात्मा गाँधी जी ने अंग्रेजी हुकूमत को हिला कर रख दिया था

दोस्तों इस कहानी की शुरुआत होती है 2 अक्टूबर 1889 से

Mahatma Gandhi Biography – महात्मा गांधी की जीवनी

Mahatma Gandhi Biography - महात्मा गांधी की जीवनी
Mahatma Gandhi Biography – महात्मा गांधी की जीवनी

Mahatma Gandhi Ji biography- महात्मा गांधी की जीवनी

पूरा नाम :                                   मोहनदास करमचंद गांधी
जन्म दिनांक :                             2 अक्टूबर 1869
जन्म स्थान :                                पोरबंदर गुजरात
पिता का नाम :                            करमचंद
माता का नाम:                             पुतलीबाई
शिक्षा :                                      1887 में मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण, 1891 में इंग्लैंड में बैरिस्टर बनकर भारत                                                                          लौटे
वाइफ :                                      कस्तूरबा गांधी
बच्चों के नाम :                             हीरालाल, मणिलाल, रामदास

महात्मा गांधी का प्रारंभिक जीवन (Early Life of Mahatma Gandhi Information)

महापुरुष महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था उनके पिता करमचंद गांधी राजकोट के दीवान थे उनकी माता का नाम पुतलीबाई था जिन्हें कबा गाँधी के नाम से भी जाना जाता था 
जो एक धार्मिक विचार वाली महिला थी और महात्मा गांधी पर भी उनके विचारों का गाना प्रभाव पड़ा महात्मा गांधी की शुरुआती शिक्षा राजकोट में हुए थे उन्होंने साल 1881 में दसवीं क्लास में एडमिशन लिया था
और आपको बता दें कि गांधीजी जब महज 13 साल के थे तभी उनकी शादी कस्तूरबा से कर दी गई थी महात्मा गांधी ने साल 1887 में मैट्रिक की परीक्षा पास की और भावनगर के सामलदास कॉलेज में एडमिशन लिया
लेकिन परिवार वालों के कहने पर उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड जाना पड़ा जहां उन्होंने अपनी वकालत की पढ़ाई पूरी की

जब इंग्लैंड से वापस लौटे महात्मा गांधी (When Mahatma Gandhi returned from England) 

सन 1891 में महात्मा गांधी जी बैरिस्टर होकर भारत वापस लौटे इसी समय उन्होंने अपनी मां को भी खो दिया था लेकिन इस कठिन समय का भी गांधी जी ने हिम्मत से सामना किया और गांधी जी ने इसके बाद वकालत का काम शुरू किया लेकिन उन्हें इसमें कोई खास सफलता नहीं मिली

गांधीजी की दक्षिण अफ्रीका की यात्रा (Mahatma Gandhi Visit to South Africa)

आत्मा गांधी जी को वकालत के दौरान दादा अब्दुल्ला एंड अब्दुल्लाह नामक मुस्लिम व्यापारिक संस्था के मुकदमे के सिलसिले में दक्षिण अफ्रीका जाना पड़ा इस यात्रा में गांधीजी को भेदभाव और रंगभेद की भावना से सामना हुआ और उन्हें अपमानजनक तरीके से ट्रेन से बाहर उतार दिया गया जो बहुत बड़ा बदलाव लाया था महात्मा गांधी के जीवन में

जब गांधी जी ने रंगभेद के खिलाफ लिए संघर्ष का संकल्प (When Gandhiji Resolve To Fight Against)

रंगभेद के अत्याचारों के खिलाफ गांधी जी ने यहां रह रहे प्रवासी भारतीयों के साथ मिलकर सन 1894 मैं नटाल भारतीय कांग्रेस का गठन किया और इंडियन ओपिनियन अखबार निकलवाना शुरू किया इसके बाद 1906 में दक्षिण अफ्रीकी भारतीयों के लिए अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत की और इस आंदोलन को सत्याग्रह का नाम दिया गया

गांधीजी की दक्षिण अफ्रीका से वापस भारत लौटने पर स्वागत (Gandhi Return to India from South Africa)

9 जनवरी 1915 में दक्षिण अफ्रीका में तमाम संघर्षों के बाद वह भारत वापस लौटे इस दौरान भारत अंग्रेजों की गुलामी का दंश  सह रहा था 9 जनवरी को भारतीय प्रवासी दिवस भी मनाया जाता है 1915 में इन्हें भारतीय केसरी उपाधि भी मिली थी लेकिन उन्होंने इसे त्याग दिया था
17 जून 1915 को साबरमती नदी के किनारे सत्याग्रह आश्रम स्थापित किया गया

About Mahatma Gandhi Biography

Mahatma Gandhi Biography - महात्मा गांधी की जीवनी
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गांधीजी के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलन (Gandhiji Moment for Indian Freedom Struggle)

महात्मा गांधी का चंपारण आंदोलन (Mahatma Gandhi Champaran Movement)
 
राजकुमार शुक्ला के निमंत्रण पर गांधी जी ने बिहार के चंपारण जिले से सन 1917 में एक सत्याग्रह किए जिसे चंपारण सत्याग्रह के नाम से जाना जाता है
गांधी जी के नेतृत्व में भारत में किया गया यह पहला सत्याग्रह था जो गांधी जी ने किया था
अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन गांधी जी की प्रथम भूख हड़ताल थी 

(Ahmedabad Mill Workers Movement Gandhiji First Hunger Strike)

1917 में अहमदाबाद में प्लेग की बीमारी फैलने के कारण मिल के कर्मचारियों को प्लेग बोनस दिया जाता था सन 1918 में मिल मालिकों ने बोनस समाप्त करने की घोषणा कर दी जिसका मिल मजदूरों ने जमकर विरोध किया
गांधीजी ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए मिल मजदूरों को शांतिपूर्वक अहिंसात्मक हड़ताल पर चले जाने को कहा और गांधीजी ने मजदूरों के समर्थन में भूख हड़ताल करने का फैसला किया हड़ताल को देखते हुए भी मालिक 20% भत्ता देने को राजी हो गए

महात्मा गांधी का खेड़ा आंदोलन 1918 (Mahatma Gandhi Kheda Movement 1918)

खेड़ा सत्याग्रह गुजरात के खेड़ा जिले में किसानों का अंग्रेज सरकार की कर वसूली के विरोध एक सत्याग्रह आंदोलन इसे प्रथम और असहयोग आंदोलन भी कहा जाता है खेड़ा आंदोलन में सरदार पटेल भी महात्मा गांधी जी का पूरा सहयोग किए थे

खिलाफत आंदोलन 1919 से 1924 (Khilafat Movement 1919 to 1924)

गरीब मजदूरों के बाद गांधी जी ने मुसलमानों द्वारा चलाए गए खिलाफत आंदोलन को भी समर्थन दिया था यह आंदोलन तुर्की के खिलाफ पद की दोबारा स्थापना करने के लिए चलाया गया था इस आंदोलन के बाद गांधी जी ने हिंदू मुस्लिम एकता का भरोसा भी जीत लिया था
वही आगे चलकर गांधीजी के असहयोग आंदोलन की नीव बना खिलाफत आंदोलन की बात करें तो तुर्की के सुल्तान थे मुस्तफा कमाल पाजा इन को अंग्रेजों ने हटा दिया था इसकी वजह से मुस्लिम ने विरोध किया था
और उसी विरोध को देखते हुए यहां के भी मुस्लिम विरोध कर दिए थे तो गांधीजी यहां के मुस्लिम को पूरा पूरा सपोर्ट किए थे और आज जो हिंदू मुस्लिम की हिसाब साथ बात होती है
तो कहीं ना कहीं वहीं से शुरुआत हुई थी कि हिंदू मुस्लिम भाई भाई बुरे समय में सहयोग करने आगे एक दूसरे का सहयोग करने आ गए

असहयोग आंदोलन 1920 (Non Corporation Movement 1920)

रोलेक्ट एक्ट के विरोध करने के लिए अमृतसर के जलियांवाला बाग में सभा के दौरान ब्रिटिश ऑफिस ने बिना वजह निर्दोष लोगों पर गोलियां चलवा दी जिसमें वहां मौजूद 1000 लोग मारे गए थे
जबकि 2000 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे इस घटना से महात्मा गांधी को काफी आघात पहुंचा था जिसके बाद महात्मा गांधी ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ शांति और अहिंसा के मार्ग पर चलकर आंदोलन करने का फैसला लिया था इसके तहत ब्रिटिश भारत में राजनैतिक सामाजिक संस्थाओं का बहिष्कार करने की मांग की 
 
इस आंदोलन में महात्मा गांधी ने प्रस्ताव की रूपरेखा तैयार की वह इस प्रकार है 
  • सरकारी कॉलेज का बहिष्कार 
  • सरकारी अदालतों का बहिष्कार 
  • विदेश माल का बहिष्कार 
  • 1919 अधिनियम के तहत होने वाले चुनाव का बहिष्कार 

Mahatma Gandhi a Biography

चौरी चौरा कांड 1922 (Chauri Chaura Movement 1922)

5 फरवरी को चोरी चोरा गांव के कांग्रेस ने जुलूस निकाला था जिसमें हिंसा भड़क गई थी दरअसल इस जुलूस को पुलिस ने रोकने की कोशिश की थी लेकिन भीड़ बेकाबू होते जा रही थी
इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने एक थानेदार और 21 सिपाहियों को थाने में बंद कर आग लगा ली इस आग में झुलस कर सभी लोग की मौत हो गई थी इस घटना से महात्मा गांधी का हृदय कांप उठा था
इसके बाद यंग इंडिया अखबार में उन्होंने लिखा था कि आंदोलन को हिंसक होने से बचाने के लिए मैं हर एक अपमान यातनापूर्ण बहिष्कार यहां तक की मौत से भी सहने को तैयार हूं 
क्योंकि महात्मा गांधी जी का कहना था कि हमें अहिंसा का ही प्रयोग करन हैं इंसा हिंसात्मक तरीके से हमें अपने देश को आजादी नहीं दिलानी है 

Civil Disobedience Movement Dandi Yatra Salt Movement 1930 (दंडी यात्रा नमक आंदोलन 1930) 

महात्मा गांधी ने यह आंदोलन ब्रिटिश सरकार के खिलाफ चलाया था इसके साथ ब्रिटिश सरकार ने जो भी नियम लागू किए थे उन्हें नहीं मानने का फैसला लिया गया था अथवा इन नियमों खिलाफत करने का भी निर्णय लिया था आपको बता दें कि ब्रिटिश सरकार ने नियम बनाया था कि कोई अन्य व्यक्ति या फिर कंपनी नमक नहीं बनाएगी
 
12 मार्च 1930 को दांडी यात्रा द्वारा नमक बनाकर इस कानून को तोड़ दिया गया था उन्हें दांडी नामक स्थान पर पहुंचकर नमक बनाया था और कानून की अवहेलना की थी गांधी जी की दांडी यात्रा 12 मार्च 1930 से लेकर 6 अप्रैल 1930 तक चली थी दांडी यात्रा साबरमती आश्रम से निकाली गई
वही इस आंदोलन को बढ़ते देख सरकार ने तत्कालीन वायस राय लॉर्ड इरविन को समझौते के लिए भेजा था जिसके बाद गांधीजी ने समझौता स्वीकार कर लिया था
दूसरा गोलमेज सम्मेलन 1931 के आखिर में लंदन में आयोजित हुआ जिसमें गांधी जी कांग्रेस का नेतृत्व

Mahatma Gandhi Ji History

Mahatma Gandhi Biography - महात्मा गांधी की जीवनी
Mahatma Gandhi Biography – महात्मा गांधी की जीवनी

महात्मा गांधी का भारत छोड़ो आंदोलन 1942 (Mahatma Gandhi’s Quit India Movement 1942)

 
ब्रिटिश शासन के खिलाफ महात्मा गांधी जी ने तीसरा सबसे बड़ा आंदोलन छेड़ा था इस आंदोलन को “अंग्रेजों भारत छोड़ो” का नाम दिया गया था पहली बार महात्मा गांधी जी को उगर देखा गया था
कि अब महात्मा गांधी जी भी उग्र हो गए थे और उन्होंने कहा था करो या मरो डू और डाई का स्लोगन उन्होंने यूज कर लिया था जो महात्मा गांधी जी ने यह बात कही थी फिर गांधी जी को इसमें गिरफ्तार कर लिया गया था
गांधीजी का नेतृत्व कोई नहीं करने वाला था जो भी था उसे गिरफ्तार कर लिया गया था इसकी वजह से भारत छोड़ो आंदोलन महात्मा गांधी का असफल रहा 

महात्मा गांधी द्वारा संपादन किए गए समाचार पत्र (Newspaper editor by Mahatma Gandhi)

  • हरिजन गुजराती में 
  • इंडियन ओपिनियन अंग्रेजी में 
  • यंग इंडिया अंग्रेजी में 
  • नवजीवन हिंदी में 

महात्मा गांधी पुस्तक (Mahatma Gandhi Book)

  • माय एक्सपेरिमेंट विथ ट्रुथ 
  • हिंद स्वराज और इंडियन होम रूल 

महात्मा गांधी जी की मृत्यु (Death of Mahatma Gandhi)

नाथूराम गोडसे और उनके सहयोगी गोपाल दास ने 30 जनवरी 1948 को बिड़ला भवन में गांधीजी को गोली मारकर हत्या कर दी थी तब से भारत देश में 30 जनवरी को शहीद दिवस मनाया जाता है

30 जनवरी 1948 को दिल्ली में स्थित बिड़ला भवन में गांधी जी को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी नाथूराम गोडसे ने गांधी जी को एक के बाद एक तीन गोली मारी थी और गांधी जी ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था हर पीढ़ी के लोग गांधीजी के बारे में पूरे विस्तार से जानना चाहते हैं  

कि आखिर 30 जनवरी 1948 शाम को क्या हुआ टी नथुराम गोडसे ने गांधी जी पर गोलियां चला दी हम आपको पूरे विस्तार से बताते हैं कि गांधीजी पर गोलियां कब चलाई गई थी और क्यों चलाई गई थी और इससे पहले वह क्या कर रहे थे नाथूराम गोडसे कैसे बिड़ला भवन तक पहुंचे और कैसे कोई उन्हें क्यों नहीं रोक पाया

गांधीजी ने 30 जनवरी 1948 को सरदार बल्लभ भाई पटेल को बातचीत के लिए शाम 4:00 बजे बुलाया था सरदार पटेल अपनी बेटी के साथ समय पर गांधी जी से मिलने के लिए पहुंच गए गांधीजी प्रार्थना सभा के बाद भी पटेल के साथ बातचीत करना चाहते थे इसलिए उन्हें वहीं रुकने के लिए कहा था

लेकिन नियति को यह मंजूर नहीं था पटेल के साथ बैठक के बाद प्रार्थना के लिए जाते समय गोडसे ने गांधी जी पर गोलियां चला दी बिड़ला भवन में हर शाम 5:00 बजे प्रार्थना सभा का आयोजन किया जाता था इस सभा में गांधीजी जब दिल्ली होते थे तो शामिल होना नहीं बोलते थे
30 जनवरी 1948 को शाम के 5:00 बज चुके थे गांधी जी सरदार पटेल के साथ बैठक में व्यस्त थे तभी अचानक 5:15 बजे गांधीजी की नजर घड़ी पर गई और उन्हें उन्हें याद आया कि प्रार्थना के लिए वक्त निकलता जा रहा है बैठक समाप्त करके गांधीजी आभा और मनु के कंधे पर हाथ रखकर प्रार्थना सभा में शामिल होने के लिए मंच की तरफ आगे बढ़ रहे थे
तभी अचानक उनके सामने नाथूराम गोडसे आ गए अपने सामने गांधीजी को देखकर नाथूराम गोडसे ने अपने हाथ जोड़ लिए और कहा नमस्ते बापू तभी बापू जी के साथ चलते वेब मनु ने कहा भैया सामने से हट जाओ और बापू को जाने दो पहले से ही देर हो चुकी है
तभी अचानक गोडसे ने मनु को धक्का दे दिया और अपने हाथों में छुपा रखी छोटी (बैरेटा) पिस्तौल गांधीजी के सामने तान दी और देखते ही देखते गांधी जी के सीने पर एक के बाद एक तीन गोलियां दाग दी दो गोलियां बापू के शरीर से बाहर निकल गई जबकि एक गोली उनके शरीर में ही फंस कर रह गई और गांधीजी वहीं गिर पड़े
महात्मा गांधी की हत्या पर नाथूराम गोडसे का बयान
Nathuram Godse’s Statement on Mahatma Gandhi’s Assassination
गांधी जी की हत्या के बाद नाथूराम गोडसे अपने बयान में स्वीकारा था कि गांधी की हत्या केवल हमने किया नाथूराम गोडसे ने बाद में दूसरे आरोपी के तौर पर अपने छोटे भाई गोपाल गोडसे का नाम लिया था गोडसे ने अपना जुर्म कबूल करते हुए कहा था शुक्रवार की शाम 4:50 बजे मैं

बिड़ला भवन के गेट के पर पहुंच गया मैं 4-5 लोगों के झुंड के बीच में घुसकर सिक्योरिटी को झांसा देते हुए अंदर जाने में सफल रहा मैं भीड़ में अपने आप को छुपाए रखा ताकि किसी को मुझ पर शक ना हो शाम 5:10 बजे मैंने गांधीजी को अपने कमरे से निकलकर प्रार्थना सभा की ओर जाते हुए देखा 


गांधीजी के अगल-बगल में दो लड़कियां थी जिसके कंधे पर वह हाथ रखकर चल रहे थे मैंने अपने सामने गांधी को आते देख कर सबसे पहले उनके महान कामों के लिए हाथ जोड़कर प्रणाम किया और दोनों लड़कियों को गांधी जी से अलग कर बोली गोलियां चला दी 

मैं दो ही गोली चलाने वाला था लेकिन तीसरी भी चल गई और गांधी जीवनी गिर पड़े गिरफ्तारी के बाद नथुराम गोडसे ने कहा जब मैंने एक के बाद एक तीन गोलियां गांधी जी पर चला दी तो गांधीजी के आसपास खड़े लोग दूर भाग गए मैंने सरेंडर के लिए दोनों हाथ ऊपर कर दिए 

उसके बाद भी कोई हिम्मत करके कोई मेरे पास नहीं आ रहा था पुलिस वाले भी दूर से ही देख रहे थे मैं खुद पुलिस-पुलिस चिल्लाया करीब 5 से 6 मिनट के बाद एक व्यक्ति मेरे पास आया उसके बाद मेरे सामने भीड़ जमा हो गई और लोग मुझे पीटने लगे 

महात्मा गांधी के हत्या की खबर चंद मिनट में ही आग की तरह फैल गई बिड़ला भवन में ही गांधी जी के शरीर को ढक कर रखा गया था तभी वहां पर उनके सबसे छोटे बेटे देवदास गांधी पहुंच गए और उन्होंने बापू के शरीर से कपड़ा हटा दिया उनका कहना था अहिंसा के पुजारी के साथ हुई हिंसा को दुनिया देखे 


दोस्तों मैं आशा करता हूं कि आप को Mahatma Gandhi Biography – महात्मा गांधी की जीवनी के बारे में पूरी जानकारी मिल गई होगी इसी तरह की और जानकारी के लिए हमारे इस HindiZila.com Blog पर daily visit करें धन्यवाद!

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