Motivational Story in Hindi For Success – Dr. Vivek Chouksey

Motivational Story in Hindi For Success Dr. Vivek Chouksey

कैसे बदले फेलियर को सक्सेस में 

डॉ. विवेक चौकसे प्रेसिडेंट फोर्डा एक्सीडेंट डॉक्टर इंडिया की सबसे बड़ी एसोसिएसन का प्रेजिडेंट हूँ यहां तक का सफर इतना आसान नहीं थी बहुत बार फेल हुआ एक कहावत होती है मेरे गाँव में ठोकर खा कर ठाकुर बनाना मेरा सब से कहना है अगर आपको किसी से प्रेरणा लेनी है तो उसक व्यक्ति से लो जो जीवन में बार बार 

असफल हुआ हो क्योंकि उसके पास कहने के लिए बहुत कुछ होता है उसके एक्सप्रिएंस होती है 
वो आपको ये बता सकता है की मैंने कहाँ कमियाँ  की है इन कमियों को आप मत करना मैंने जो गलती की है वो गलती आप मत करिये सफल वयक्ति के पास ज्यादा कुछ कहने को नहीं होता है
Motivational Story in Hindi For Success
Motivational Story in Hindi For Success

Motivational Story in Hindi

मैं सुरु करता हूँ अपने बचपन से मैं बहुत छोटे से गांव का हूँ मेरा गॉव जंगल में था स्कूल नहीं था सड़क नहीं था बिजली नहीं आती थी और पांचवी तक स्कूल था मेरे गॉव में जब मैंने पढ़ाई की जिस बोतल में खांसी की दवा होती थी जब दवाई ख़त्म होती थी तो मेरी माँ उसे रख लेती थी और उसमे धागा डाल कर दिया बनती थी हमें पढ़ने के लिए जब हम पढ़ने जाते थे तब साथ में एक फट्ठी लेके जाते थे उसपे बैठ के पढ़ने के लिए

हमारे पास बैग नहीं होती थी तो जब हमारी माँ साड़ी खरीदने जाती थी तो जो पन्नी मिलती थी उसमे हम लोग बुक लेके जाते थे और जब स्कूल जाते थे तब अपने दोस्तों को दिखाते थे ये देखो नयी पन्नी लाया हूँ और हम बहुत खुश होते थे  मेरे गॉव में पांच तक ही स्कूल था तो जब मेरी दीदी 6th Class में आई तो हम सहर में पढ़ने जाते थे मेरे घर से 10 कि. मी. था और हमें पैदल जाना पड़ता था
और बिच में एक नदी आती थी उसे क्रॉस कर के जाना पड़ता था कई बार बारिश जब आती थी तो रस्सी को पकड़ कर हम नदी पार करते थे और मेरे पापा वहां तक छोड़ने जाते थे फिर हमें पढ़ने के लिए टाइम नहीं मिलता था क्योंकि आने जाने में ही थक जाते थे फिर हमने किराये पर एक रूम ले लिए और उस टाइम मैं 4th  क्लास में था और मेरी दीदी 6th क्लास थी 

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और इस टाइम में 4th क्लास के बच्चे को उनके माता पिता कपडे पहनाते है और स्कूल के लिए रेडी करते है लेकिन हम दोनों भाई बहन अपने हातों से खाना बनाते थे खाते थे सब कुछ करते थे कोई नहीं था हमारे साथ रहने वाला मेरे पापा आते रहते थे लेकिन वो भी 2-3 दिन में चले जाते थे  मेरे पापा किसान हैं तो किसान अपने खेतों से दूर रहेगा तो किसानी नहीं कर पायेगा 
फिर मेरा जवाहर नवोदय विद्यालय में सलेकशन हो गया और नवोदय का नाम अपने आप में एक संघर्ष है और नवोदय से निकला हुआ व्यक्ति अपने आप में सघर्ष कर के निकलता है उस समय नवोदय में सिलेक्ट होना बहुत बड़ी बात थी फिर कुछ टाइम हुआ मेरे दोस्त बने और नवोदय विद्यालय समशान घाट के पास में था तो जब समशान घाट पर किसी की बॉडी जब आती थी अंतिम संस्कार के लिए 
तो जो साथ में आते है वो बीड़ी सिगरेट तम्बाकू जो भी सामान होता था उस बन्दे का वो उसके साथ फेक देतें है तो मैं और मेरे दोस्त उन बीड़ी और सिगरेट को पीते थे ऐसे ही कुछ टाइम तक चलता रहा  लेकिन क्या हुआ लंच के बाद जब हम बंक मारते थे उसके बाद मैथ्स की क्लास होती थी फिर मेरी 10th में सप्ली आ गई फिर मैं बहुत डिप्रेशन में हो गया मुझे ताने पड़े घरवालों से की संघत में बिगड़ गया

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बहुत बोले लगभग मेरी पढ़ाई छूट गई थी  एक महीने बाद सुपल्लीमेंट्री का एग्जाम होना था भोपाल में लेकिन जिस दिन मेरा एग्जाम था उस दिन बहुत बारिश हुई और मैं एग्जाम नहीं दे पाया फिर लाइफ में टर्निग पॉइंट आया मैं हमेशा हर व्यक्ति से बोलता हूँ अगर आपके जीवन में आपको लग रहा है की कुछ गलत हो रहा है तो गलत नहीं हो रहा हो सकता है कुछ बड़ा आपको मिलने वाला हो 
बी पॉजिटिव, जो होता है अच्छे के लिए ही होता है ऊपर वाला आपका बुरा चाहता ही नहीं है ये आप पर निर्भर करता है की आप कैसे लेते हो नेगेटिव लेते हो या पोजटिव लेते हो उस समय मैं बहुत डिप्रेस हो गया था की मैं 10th  में फेल हो गया और अब मुझे दुबारा 10th करनी पड़ेगी और मेरे घरवाले बोल रहे थे की अच्छा हुआ फेल हो गया अब ये घर में खेती किसानी करेगा लेकिन मेरी माँ बोली नहीं इसे एक मौका और दो
अगर इसे खेती किसानी करनी ही है तो एक साल पढ़ के कर लेगा अगर फेल होता है तो कर लेगा और हमें खेती ही करनी होती है 12th तक पढ़ लिए और किसानी करो हमारे यहाँ यही ट्रेंड चलता है लेकिन मैं इस बार  में मेहनत किया कियोंकि में एक बार ठोकर खा चूका था और अधिकांश लोग एक बार फेल होने के बाद अपनी लाइफ को टर्निग पॉइंट देते है या तो आगे बढ़ जाते है या फिर निचे गिर जाते हैं 
फिर मैंने दुबारा से एग्जाम दिया और मैं तहसील में टॉप किया फिर मैंने  11th का एग्जाम दिया 96% फिर  12th का एग्जाम दिया फिर एक बार तहसील टॉप किया 12th के बाद फिर मैं पि एम् टी करने गया टीचर ने मेरा फॉर्म भरा बोला बेटा तुम डॉक्टर बनो बायो में तुम्हारे अच्छे मार्क्स है फिर मैं पि एम् टी की कोचिंग की इन्दोर जाके
लेकिन वहां पर मेरा सिलेक्शन नहीं हुआ फिर से लाइफ का टर्निंग पॉइंट आ गया 

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फिर डिप्रेशन हो गया फिर से ठोकर लगी तब मैंने माँ से कहा की माँ एक मौका और दो मुझे पहली बार इसलिए नहीं हो पाया था की मुझे कोई गाइड करने वाला नहीं था और पि एम् टी का एग्जाम बहुत हार्ड होता था इस बार मैं सलेक्शन होक दिखाऊंगा फिर दूसरी बार मध्य प्रदेश में मेरी 44 रैंक आयी  इसके बाद से मेरा सफर आज तक नहीं रुका मैं हमेशा से हर इंसान से यही बोलता हूँ 
आपके जीवन में कुछ ऐसा लगे जो आपको बुरा लगे तो नेगेटिवमत होइए हो सकता है आपके लाइफ में उससे अच्छा कुछ हो तो हमेशा पॉजिटिव रहिये मेरे थिसिस का टॉपिक सुसाइड है जब मैंने 3 साल एक्सप्रिएंस किया मेरे पास सुसाइड के जितने केस आये उनमे से सबसे जयदा पढ़े लिखे लोग थे मुझे लगता था जिनके पास जॉब नहीं होती वो लोग सुसाइड करते है पर ऐसा नहीं था 
सुसाइड क्यों करते हो आपकी लाइफ यही तक नहीं है हो सकता है की अब शुरुआत हुई हो लाइफ में सुसाइड करना समस्या का हल नहीं है एक बहुत बड़ी चीज मैं आपको बता दू मैं बचपन में अछूत था मैं जहाँ जाता था एक पंडित आंटी थी वहां पर मैं पढ़ने जाता था तो मुझे और मेरी दीदी को अलग बैठाते थे मैं अपनी माँ से पूछा की हमें अलग क्यूँ बैठाते हैं फिर मेरी माँ ने कहा की

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बेटा जन्म से कोई छोटा बड़ा नहीं होता कर्म से छोटा बड़ा होता है और आज वही लोग जो मेरे हाथ का पानी नहीं पीते  थे मुझे अपने पास बैठाते नहीं थे वही लोग मुझसे हेल्प लेने आते है क्यों क्योंकि मैंने उनको जवाब दिया अपने काम से मैंने जवाब दिया कुछ बन के भीमराव अम्डेकर जिन्होंने संविधान लिखा जगह जगह उनकी पोस्टर लगी है क्यों उन्होंने जवाब दिया अपने कर्म से 
पैसा मायने नहीं रखता मायने रखता है आपका कर्म की लोग आपको आपके क्रमों से याद रखे हमेशा एक गोल सेट करिये कुछ बड़ा बनने की कोशिश कीजिये आप जवाब दीजिये अपंने काम से आप जिस भी फिल्ड में हो उस फिल्ड में बेस्ट कीजिये मैं एक ऐसे गाँव से हूँ जहाँ पर पानी नहीं बिजली नहीं रोड नहीं स्कूल नहीं था और मैंने हर स्टेज को पास किया अगर मैं डॉक्टर बन सकता हूँ 
तो हर व्यक्ति देश के किसी भी कोने में रहे कितनी भी विकट परिस्थितियों में रहे हर व्यक्ति कुछ न कुछ बन सकता है तो मेरा सबसे ये कहना है जो संघर्ष होते है उनका ध्यान मत दीजिये आपको बस अपना काम करते रहना है बस आपको अपना गोल पता होना चाहिए की मुझे ये बनना किसी भी हालत में 
मैंने अपने रूम के बाहर लिखा था I am a Doctor और मैंने Doctor बन के दिखाया किसी भी परिस्थिति में नेगेटिव मत होइए लाइफ में टर्निंग पॉइंट बहुत आते हैं और वो आपको डिसाइड करना है की किस तरफ आपको जाना है हमेशा सघर्ष वाले रास्तो पर सफलता बाद में मिलती है लेकिन जब मिलती है न तो उसका मज़ा  आनंद बहुत मजेदार होता है 

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