Motivational Story in Hindi – Sunita Chaudhary

Motivational Story in Hindi – Sunita Chaudhary

Motivational Story in Hindi – Sunita Chaudhary

मेरा नाम सुनीता चौधरी है मेरी शादी बहुत छोटी सी उम्र में मेरे माता पिता कर दिये थे सादी होने के बाद मैं अपने ससुराल चली गयी लेकिन मेरे ससुराल वाले दहेज के लालची थे वो हमेशा मुझे ताना मारते थे कहते थे इसके बाप ने कार नहीं दिया न तो पैसे दिया न कुछ सामान दिया है और हम लोग एक डॉक्टर हैं दिल्ली जैसे शहर में रहते हैं मेरे पड़ोस के लोग क्या कहेंगे कि इसके लड़के को इसके शसुराल वाले कुछ दिये नहीं हैं
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(Motivational Story in Hindi Sunita Chaudhary)

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यहाँ तक मेरे ससुराल वालों ने दहेज़ के कारना हमेशा मुझे मारते थे मैं इन लोगों के टॉर्चर से परेशान हो गयी उसके बाद मैं अपने मायिके चली आयी फिर मैं अपने माता पिता को देख कर बहुत खुश हो गयी फिर सारी बातें अपने माता पिता से बताने लगी और मैं बोली कि मैं उस घर में दुबार कभी नहीं जाऊँगी क्योंकि वो लोग मुझे बहुत मारते हैं मुझे खाना नहीं देते हैं बहुत परेशान करते हैं तो मेरे पिता जी कहे कि बेटी जिस घर मे लडकी कि शादी हो जाती है 

तो उसके बाद लडकी के ससुराल से सिर्फ उसकी अर्थी आती है और आप उस घर से फिर कभी मत आना अगर कोइ बात होती है तो आप हमारे पास खबर भेज देना फिर अपने पिता जी के कहने से मैं फिर से अपने शसुराल चली गयी अभी मुझे सिर्फ आये हुये तीन दिन हि हुये थे तीन दिन के बाद में खाना बनायी कपड़े धोई तो मेरे जो शसुराल वाले थे उन्होंने किसिको को फोने किया तो मैं इस फोने से इतनी वाकिफ नहीं थी की फोने शायद हाल चाल पूछने का हि होगा

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वो लोग एक कार लाये और मुझे कार के अंदर डाल के वो जंगल के रास्ते मुझे हरियाणा में ले गये हरियाणा के जंगलों में ले जाके कार रोकी और वहाँ पर हि उनका एक मकान बना हुआ था जंगल के अंदर मुझे ले जा कर छत के उपर बांध दिया बाँधने के बाद वो लोग मुझे बहुत बेरहमी से मारते रहे मैं सोचि आज तो मेरी मौत है आज मेरा बच पाना बहुत मुस्किल है वो लोग मारते रहे मैं रोती रही मैने कहा मुझे मत मरों तो वो कहते हैं अब देखते हैं कि तुमको कौन बचाने आता है 
उन्होंने मुझे मार पीट के छत पर हि उपर फेक दिया जिस तरह किसी कुत्ते को खिचा जाता है वैसे हि वो लोग मुझे खिच के फेक दिये मेरी हालत बहुत खराब थी और मैं सांस भी नहीं ले पा रही थी मैं बेहोस थी तो उन्होने ने सोचा कि अब ये मर गयी है फिर वो लोग वहाँ पर गड्ढा खोदने लगे मुझे धफ्न करने के लिये किसी तरह मुझे होश आया होश आने के बाद मैं छत पर से हि निचे कुद गयी कहतें हैं जान बहुत प्यारी होती है तो कूदने कि आवाज वो लोग सुन गये

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फिर वो लोग भी मेरे पीछे दौड़ पड़े मुझे ये भी नहीं पता कि मैं किस तरफ भाग रही हूँ किधर जाना है मुझे ये भी नहीं पता था फिर भी मैं भागती रही भागती रही आगे कुत्ते भोंक रहे थे तो मैं अपनी जान बचाने के लिये एक झुग्गी थीं मैं उसमें छिप गयी और मैं डर के मारे मैं थर थर कांप रही थी जब मैं झुग्गी में घुसी तो जो वहाँ के लोग थे वो चोर चोर करके शोर मचाने लगे तो कोइ टॉर्च लेके आ रहा तो कोइ लाठी लेके आ रहा है तो जैसे हि वो लोग टॉर्च मारे
तो सब लोग बोले पकडो साले को फिर उसी टाइम मैं कंपकंपाती अवाज मे बोली मैं चोर नहीं हूँ और मैं अपनी जान बचाने के लिये यहाँ पर छिपी हूँ फिर मुझे बाहर निकाले मेरे कपड़े सब फटे थे और उस टाइम मैरी आवाज भी नहीं निकल रही थी बहुत बुरा हाल था मेरा बाहर जैसे ही निकाला बैठाया मुझे तो मुझसे बैठा भी नहीं जा रहा था क्यों मैं बहुत दुर तक भागी थीं और मेरे शरीर पर घाव भी बहुत था फिर लोगों ने पूछा तो तो मैं बतायी

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की ये लोग दिल्ली के है मेरे ससुराल वाले और मुझे मार रहे हैं और में जान बचा के भाग रही हूँ फिर वो लोग इकट्ठे हुये उसके बाद उस इलाके के थाने मे गये वहाँ का पुलिस कहने लगा की मामला दिल्ली का है आप दिल्ली जाइये यहाँ कुछ नहीं हो सकता क्योंकि जो लोग आपको मारने के लिये आये थे वो भी दिल्ली के थे और आप भी दिल्ली के तो वहीं पर कम्प्लेन होगी तीन चार दिन मुझसे उठा नहीं जा रहा था जब मैं लेटती तो लेटा भी नहीं जाता था 
क्योंकि वो लोग मुझे बहुत मारे थे मेरे शरीर मे इतने जख्म थे वो बहुत दर्द करते थे ये लोग मुझे दुध हल्दी दीयादवाई दिलाई फिर जब मैं थोड़ा ठीक हुइ तब बोले कि आप दिल्ली चले जाओ और थाने में कम्प्लेन करो फिर में वहाँ से किसी तरह दिल्ली आ गई फिर पुलिस थाने गई पुलिस कि गाड़ी मुझे All India Medical लेके गये और वहाँ पर मैरी Treatment हुई और वहाँ पर FIR मुकक्द्मा भी दर्ज हुआ फिर मेरे रहने के लिये कहीं कोइ ठीकाना नहि था 
फिर मुझे एक अनाथ आश्रम में भेज दिया गया फिर में अनाथ आश्रम में रहने लगी जब वो लोग मुझे मार के घर से निकाले थे तब दो महीने कि गर्भवती थी अब अनाथ आश्रम में रहने के बाद जो कि लाजपत नगर में था में काम भी करती और मैरी जैसी और भी कई औरत रहती थी फिर तीन महीने बाद मुझे डॉक्टर के पास ले गये तो डॉक्टर बोली कि इसके पेट में बच्चा है फिर आश्रम वाली मैडम बोली कि हम लोग गर्भवती औरत को नहीं रखते 

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आप या तो गर्भपात करा दिजिये या तो आश्रम छोड़ के चले जाओ मेरे आगे कोइ रास्ता नहीं था समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ क्योंकि मेरे माता पिता भी बोले थे कि माइके मे बेटी कि सिफ अर्थी आती है अब मैडम एक दिन मुझे गाड़ी में बैथा के अस्प्ताल ले गई गर्भपात कराने के लिये फिर मैं वहाँ से भागने लगी मैडम कहने लगी आप कहाँ जा रहे हो या तो गर्भपात कराओ नहीं तो हम तुम्झे आश्र्म से निकाल देंगे तो मैं बोली मैडम मुझे इन औजारो को देख के डर लग रहा है 
और कुछ भी हो मैं गर्भपात नहीं कराऊंगी तो मैडम ने गाड़ी में बैठाया और बोली आपने ने हमारी बात नहीं मानी हम आपको आश्र्म में नहीं रखेंगे मैडम ने भी मुझे निकाल दिया फिर मैं सड़क पर आ गइ फिर मैं काम कि तलाश करने लगी घरों में जाके पूछती कि मैं आपके यहाँ काम करना चाहती खाना बनाना झादु पोछा कुछ भी कई घरों में गई लेकिन काम नहीं मिल रहा था उस समय मुझे लग रहा था कि मुझे रहने के लिये कोइ छत हि मील जाये 
मुझे पैसे भी नहीं चहिये लेकिन मुझे रहने के लिये एक छत मील जाये मैं बहुत परेशान हुइ उस दिन मुझे कोइ काम नहीं मिला मैं थक गई फिर एक अस्पताल के बाहर जाके लेट गर्ई उसके बाद मुझे साकेत में काम मिला और एक औरत थी उसी के साथ मैं झुग्गी में रहती थीं काम मिला था वहाँ खाना बनाना पोछा सब कुछ करती थी समय बीतता गया और मेरा पेट भी बढ़ता गया फिर में डॉक्टर के पास गई डॉक्टर ने पूछा आपके साथ कौन है 
तो मैं बोली कि सर अभी मेरे साथ कोइ नहीं है सब लोग बहुत दुर हैं तो डॉक्टर ने बोला कि हम अकेले मरीज को भर्ती नहीं करेंगे किसी को बुला लो तो कर लेंगे उसके बाद मेरा रोते रोते बुरा हाल हो गया और मैं बेहोश हो गई एक हप्ते के बाद मुझे होश आया तो मैं देखी मुझ बोतल चढ़ रही है फिर डॉक्टर आया और बोला कि आप एक हप्ते से बेहोश थीं और आपको लड़का हुआ है आपका बच्चा Major Operation से हुआ है आपका खुन पानी हो गया है

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फिर कुछ दिन के बाद मेरा बच्चा Expire हो गया फिर मैं सोची कि मुझे कुछ करना पड़ेगा मैरी Education भी कम थीं फिर मैं Driving सीखी उसके बाद में कंडक्टर कि नौकरी करने लगी फिर मैं सोची कि मैं कुछ अपना करूँगी तो ज्यादा पैसा मिलेगा फिर मैं गाड़ी की Training ली फिर लाइसेंस भी बना फिर मेरे पास गाड़ी नहीं थी बहुत धक्के खाने के बाद मुझे किराये पर ऑटो मिला फिर मै दिन रात ऑटो चलाके पैसा इकट्ठा किया
फिर परिवहन विभाग होता है तो उसमें Vacancy निकली तो मैं ऑटो के लिये फोर्म भर दि फिर वो लोग देखे कि ये तो एक लडकी है और आज तक किसी लडकी के नाम से ऑटो नहीं आया फिर वो सोचें क्या करे तब वो लोग मीटिंग किये और AK इस्पेसल रखा जिसका नंबर था DLJ मॉडल था जिसको कोइ और नहीं चला सकता सिर्फ मैं चला सकती तो दिल्ली में पाँच हजार ऑटो आयी उसमें से एक मुझे भी दिया गया फिर खुद का ऑटो आने के बाद
तो मेरी खु़शी का कोइ ठीकाना हि नहीं था फिर मैं काम करने लगी और जो मेरा ऑटो है वो किसी BMW से कम नहीं लगता मेरे ससुराल वाले मुझे एक गाड़ी के लिये घर से निकाल दिये और आज मेरे पास बाड़ा तो नहीं पर एक छोटा सा घऱ है और मैरी खुद कि एक गाड़ी है
कृपया कर के आप इस कहानी को ज्यादा से ज्यदा शेयर करे और दहेज प्रथा को बंद कर दे ताकि फिर से किसी कि बहन बेटी को ऐसी सजा न मिले क्योंकि आपकी भी बहन बेटी है. धन्यवाद

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